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हसन रिज़वी के कुछ क़लाम

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amaan_khan


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i want to post poetry in hindii





कभी किताबों में फूल रखना
कभी दरख़्तों पे नाम लिखना
हमें भी है याद आज तक वो
नज़र से हर्फ़-ए-सलाम लिखना

[daraKht=tree; harf=letter (as in alphabet)]


वो चाँद चेहरे वो बहकी बातें
सुलगते दिन थे महकती रातें
वो छोटे-छोटे से काग़ज़ों पर
मुहब्बतों के पयाम लिखना

[payaam=message]


गुलाब चेहरों से दिल लगाना
वो चुपके चुपके नज़र मिलाना
वो आरज़ूओं के ख़्वाब बुनना
वो क़िस्सा-ए-नातमाम लिखना

[qissaa=tale/story; naatamaam=unfinished]


मेरे नगर की हसीं फ़ज़ाओ
कहीं जो उन के निशान पाओ
तो पूछना ये कहाँ बसे हो
कहाँ हैं उन का क़याम लिखना

गई रुतों में "हसन" हमारा
बस एक ही तो ये मशग़ला था
किसी के चेहरे को सुबह कहना
किसी की ज़ुल्फ़ों को शाम लिखना

[mashaGalaa=preoccupation]
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तेरी गुफ़्तगू में है जो चाशनी जो तेरे लबों में हलावतें
न सुरूर वो फ़स्ल-ए-बहार में न गुलों में लताफ़तें

कहाँ रह गईं तेरी निगहतें वो सबा किधर को निकल गई
तेरी आहटों को तरस गाईं मेरे जिस्म-ओ-जाँ की सम'अतें

तेरे अंग अंग अमिं लोच है मेरे दिल के सोज़-ओ-ग़दाज़ का
मेरे ख़ून-ए-दिल से रक़म हुईं तेरे रन्ग-ओ-बू की हिकायतें

मेरी चश्म-ए-ग़म दिल-ए-मुज़तरिब ग़म-ए-आरज़ू ग़म-ए-जुस्तजू
लिये फिर रहा हूँ नगर नगर किसी मेहेरबाँ की अमानतें


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ये शब-ए-फ़िरक़ ये बेबसी हैं क़दम क़दम पे उदासियाँ
मेरा साथ कोई न दे सका मेरी हसरतें हैं धुआँ धुआँ

मैं तड़प तड़प के जिया तो क्या मेरे ख़्वाब मुझ से बिछड़ गये
मैं उदास घर की सदा सही मुझे दे न कोई तसल्लियाँ

चली ऐसी दर्द की आँधियाँ मेरे दिल की बस्ती उजड़ गई
ये जो राख-सी है बुझी बुझी हैं इसी में मेरी निशानियाँ

ये फ़िज़ा जो गर्द-ओ-ग़ुबार है मेरी बेकसी का मज़ार है
मैं वो फूल हूँ जो न खिल सका मेरी ज़िन्दगी में वफ़ा कहाँ


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i

rmrizwan


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samj tu nahi aii per nice hi hoo gii


amaan shab


_________________
Tujy yaqeen tu nahi per sach yehi hai
mAin Teray Wasty UmariAn Guzarr Sakta Hoon
Yehi Nahi K TuJy PAa LaynY Ki KhawHish Hai
Main TerAy Wasty Khud Ko Bhi HaRR Sakta Hoon

For My Sweet Heart

ERUM ALI

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*Administrator*
*Administrator*
lkain mujhe ataai hai himdi iseliye main parh sakti hon aur bahoot achi ha


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